Tuesday, 3 June 2014

Indian JUGAAD on its best

हम मध्यम वर्ग परिवार पूरी जिंदगी अपनी जरुरतो से ही जूंझते रहते है, ऐसे में कम स्त्रोतों में अपनी अधिक से अधिक जरुरतो को पूरा करना ही हमारा लक्ष्य रहता है | जब कभी हम अपनी जरुरतो को पूरा कर पाने में असमर्थ होते है तब हम 'जुगाड़' की तरफ जाते है | ये  कहा भी जाता है कि जरूरते अविष्कार  की जननी है |
आखिर है क्या ये जुगाड़ ?
कम रुपयो में अपनी जरुरत को अस्थायी रूप से पूरा करना जुगाड़ कहलाता है, भले  ही जुगाड़ अविश्वसनीय होते हो पर होते सुविधाजनक  ही है |
जुगाड़ों कुछ उदहारण यहाँ पेश है |
कितना विचित्र और अतुल्य है ना इन जुगाड़ों के साथ भारत ||