हम मध्यम वर्ग परिवार पूरी जिंदगी अपनी जरुरतो से ही जूंझते रहते है, ऐसे में कम स्त्रोतों में अपनी अधिक से अधिक जरुरतो को पूरा करना ही हमारा लक्ष्य रहता है | जब कभी हम अपनी जरुरतो को पूरा कर पाने में असमर्थ होते है तब हम 'जुगाड़' की तरफ जाते है | ये कहा भी जाता है कि जरूरते अविष्कार की जननी है |
आखिर है क्या ये जुगाड़ ?
कम रुपयो में अपनी जरुरत को अस्थायी रूप से पूरा करना जुगाड़ कहलाता है, भले ही जुगाड़ अविश्वसनीय होते हो पर होते सुविधाजनक ही है |
जुगाड़ों कुछ उदहारण यहाँ पेश है |
कितना विचित्र और अतुल्य है ना इन जुगाड़ों के साथ भारत ||