Friday, 23 October 2015

देश की बेहतरी के लिए उठे हाथ तो बना हैल्पिंग हैंड्स अलवर : दीपक चंदवानी

www.helpinghandsalwar.org
देश के लिए कुछ करने की एक सोच जब किसी युवा के जेहन में उठी तो एक एक कर सैंकड़ों युवा जुटते चले गए और एक ऐसा समूह उठ खड़ा हुआ जिसने अलवर के इतिहास का सबसे लंबे समय तक लगातार चलने वाला आंदोलन चलाया | आज हैल्पिंग हैंड्स समूह को अलवर में स्वच्छता की दिशा आंदोलन करते एक वर्ष हो गया है | ये आंदोलन दूसरे आन्दोलनों की तरह प्रशासनिक संस्थाओं को कोसने या व्यवस्थाओं के नाम आरोप प्रत्यारोप तक ही सीमित नहीं है, बल्कि जो उत्साही युवा इस समूह से जुड़े उन्होंने जमीन पर उतर कर अपनी जिम्मेदारी का निर्वाह भी किया है | किसी रोज़ आप अपने घर से निकलें तो कोई आश्चर्य नहीं कि आपको ये नवयुवा बड़ी संख्या में सड़कों पर झाडू लिए गंदगी से लड़ाई लड़ते, नालों में उतर कर सदियों से जमी जड़ता की कीचड़ को साफ़ कर देश के भविष्य को खोजने का प्रयास करते हुए दिखाई दें या किसी शाम गिटार और डफली लेकर जोशीली आवाज़ में आपको देश के भविष्य के लिए अपनी मानसिकता परिवर्तित करने के गीत गुनगुनाते सुनाई दें | जहाँ एक ओर जनता के प्रति उत्तरदायी लोग झाडू के साथ फोटो क्लिक करवा कर अपने दायित्व की इतिश्री मान लेते हैं तथा दूसरी ओर फैशनपरस्ती के समसामयिक माहौल में आज का दिग्भ्रमित युवा महँगे ब्रांडेड कपडे पहन हवा से बातें करती गाड़ियों पर अपनी ही दुनिया में मस्त रहने में यकीन करता है, वहीं हैल्पिंग हैंड्स से जुड़े स्कूल कॉलेज के सैकड़ों छात्र छात्राएँ इस आभासी दुनिया से बहुत ऊपर उठकर चेहरे पर मास्क और हाथों में ग्लव्ज पहने अपने नाज़ुक हाथों मगर आत्मविश्वास से परिपूर्ण मानसिकता से बिना किसी लाभ की आशा के देश के लिए कुछ करने के जज्बे को दिल में संजोये सड़कों पर निकलते हैं | हैल्पिंग हैंड्स से जुड़ने वाला युवा एक ऐसा काम कर रहा है जिसे समाज किसी एक विशेष समुदाय का काम मानता है, धरातल पर काम करने से समाज के बहुत से युवाओं की सोच में आमूलचूल परिवर्तन हुआ है और जीवन के विविध अनुभवों से उनका हृदय और मस्तिष्क परिष्कृत हुआ है | सफाई को बहुत तुच्छ काम समझने के कारण ही आज देश में इतनी गंदगी फ़ैल गई है | सारी दुनिया के विकसित देशों के साथ तुलना की जाए तो हमें अपना देश कचरा पात्र से अधिक नहीं लगता | आज रह रह कर कवि मुक्तिबोध की  पंक्तियाँ दिलो दिमाग में कौंध जाती हैं ...."लिया बहुत बहुत ज्यादा, दिया बहुत बहुत कम......मर गया देश, अरे जीवित रह गए हम" | हैल्पिंग हैंड्स का हर सदस्य इस बात से बखूबी परिचित है कि हर नागरिक की अस्मिता का सीधा जुड़ाव उसके देश की अस्मिता से होता है | अपने देश की अस्मिता को बनाए रखने के लिए किए जा रहे युवाओं के निष्काम कर्म से प्रेरित होकर देश का नागरिक भी अब जागरूक होने लगा है | अनेक कॉलोनियों में से ये खबरे आने लगी हैं कि लोग अपने घरों से निकलकर अपने पास-पड़ोस को साफ़ करने की दिशा में काम करने लगे हैं | अनेक दुकानदारों ने डस्टबीन खरीदकर अपने दुकानों के सामने रख लिए हैं | एक ओर जहाँ प्रशासन करोड़ों रुपये के वार्षिक बजट के बाद भी शहर को साफ़ करने में अपनी अक्षमता प्रदर्शित करता है वहाँ ये युवा अपने घर से साफ़ सफाई का सामान लाते हैं और सड़कों, बाजारों, कॉलोनियों पर अपने दायित्व का निर्वाह करने के लिए निकलते हैं | आज एक वर्ष की यात्रा के दौरान इस समूह से 100 से अधिक शिक्षण संस्थाओं के सदस्यों तथा अलवर शहर के 10 हजार से अधिक नागरिकों ने स्वच्छता अभियान में भाग लेकर अपने जिम्मेदार नागरिक होने का सच्चा सबूत दिया है | हैल्पिंग हैंड्स अलवर की पहल से प्रेरित होकर अब शहर से बाहर भी बम्बोरा, तिजारा, बहादुरपुर, मुंडावर, मौजपुर और जयपुर में भी युवाओं ने अपने क्षेत्र की तस्वीर बदलने का निशचय किया है |

हैल्पिंग हैंड्स समूह के युवा स्वच्छता ही नहीं अपितु देश के भविष्य के लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण पहलू “शिक्षा” पर भी काम कर रहे हैं | इस अभियान के अंतर्गत शहर के शिक्षित युवा शहर की कच्ची बस्तियों में जाकर जीवन की आधारभूत सुविधाओं से वंचित वर्ग के बच्चों के बीच हर शनिवार और रविवार ज्ञान की ज्योति जलाकर अज्ञान रुपी अन्धकार को दूर करने का प्रयास भी कर रहे हैं | अभी यह अभियान शहर के अखैपुरा कच्ची बस्ती में चल रहा है पर अब शहर के सैकड़ों युवक युवतियों और अनेक प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थाओं के साथ आने से शहर की छोटी-बड़ी 40 कच्ची बस्तियों में इस आंदोलन को चलाने की राह आसान हो गई है |
युवाओं के हौंसले और उत्साह को देखते हुए कहा जा सकता है कि वह दिन दूर नहीं जब हिन्दुस्तान अपनी गौरवशाली परम्पराओं और संस्कृति की उदात्तता को पुनर्स्थापित करने में सफल होगा | प्रसिद्ध गज़लकार दुष्यंत कुमार ने संभवतः युवाओं के दिलों में छुपी दृढ़ता की इसी चिंगारी को पहचानते हुए कहा था ----

“एक चिंगारी कहीं से ढूंढ लाओ दोस्तों इस दिए में तेल से भीगी हुई बाती तो है”

लेखक
दीपक चंदवानी