Tuesday, 28 October 2014

"आप" से मुझे क्या मिला ?


'आप' से मुझे क्या मिला ?

             
             अक्सर कई लोगों का मुझसे यह सवाल रहता है कि आम आदमी पार्टी से जुड़कर मुझे क्या मिला? अब लोगों को सवाल पूछने से मना तो नहीं किया जा सकता लेकिन उनके इस सवाल का जवाब तो दिया ही जा सकता है | आज का यह लेख में उसी विषय पर लिख रहा हूँ|

        जुलाई 2012, अन्ना हजारे के नेतृत्व में इंडिया अगेंस्ट करप्शन का लोकपाल आन्दोलन अपने चरम पर था | पूरे देश से मजबूत व सशक्त लोकपाल क़ानून बनाने की मांग उठने लगी थी | पूरा देश अन्ना हजारे व अरविन्द केजरीवाल के साथ इस लड़ाई में खड़ा होना चाहता था | मैं भी अलवर में लोकपाल आन्दोलन में शामिल हुआ चूँकि मै उस समय वक्त परिपक्व नहीं था और न ही मेरे परिवार के सदस्य मुझे दिल्ली जाने की अनुमति देते लेकिन T.V. के माध्यम से मेरा उत्साह दिन-प्रतिदिन बढ़ रहा था | मैं सोशल मीडिया पर कैंपेन  से जुडा और आन्दोलन की हर गतिविधि की नजर रखने लगा | अब तक मैं दिल से अन्ना हजारे व केजरीवाल से जुड़ चुका था |

               बहुत कोशिशों व प्रधानमन्त्री के लिखित वादों के बाद भी लोकपाल बिल पास न हो सका और जब सभी प्रमुख पार्टियों का लोकपाल के प्रति उदासीन रवैया दिखा, तब सभी लोगो को समझ आने लगा था कि कांग्रेस, बीजेपी, सपा, बसपा तथा अन्य सभी पार्टिया इस देश को कभी लोकपाल नहीं दे सकती, इस हेतु किसी अन्य विकल्प का होना आवश्यक है | तब कही इंडिया अगेंस्ट करप्शन के मंच से आम आदमी पार्टी का उदय हुआ |
             मैंने एक दिन अखबार में इंडिया अगेंस्ट करप्शन की मीटिंग की खबर (अलवर में ) पढ़ी | मै मेरे मित्र (हितेश चंदनानी ) जो कि खुद भी मेरी तरह इस आन्दोलन से जुड़ने के लिए उत्साहित था, को दी | हम दोनों तय समय पर मीटिंग में पहुंचे  | कुछ लोग (रमेश बेक्टर, दीपक मिश्रा, धीरज यादव, अलंकार माथुर व कुछ अन्य साथी ) जिनमे से एक दो के पास पार्टी की टोपी थी, लगाए हुए बैठे हुए थे और एक बैनर लगा हुआ था | (इस समय तक पार्टी के नाम की घोषणा नहीं हुई थी )

              यह वह समय था, जब से मेरे व्यक्तित्व में परिवर्तन आना शुरू हो चुका था | मैं  इस वक्त 18 वर्ष का था |  मैंने अभी तक किसी भी सामाजिक व गैर-सामाजिक संगठन के साथ काम नहीं किया था और मैं सीधे ही एक राजनैतिक पार्टी से जुड़ गया था |  ऐसी पार्टी/दल जो कि राजनैतिक व प्रशासनिक बदलाव लाने के लिए पैदा हुई थी, जिसे हर कदम पर चुनौतियों का सामना करना था, जिसके चारों और दुश्मनों की कमी नहीं थी | यह सब मालुम होने के बावजूद मैंने इस चुनौतीभरे आन्दोलन को स्वीकारा और इस परिवर्तन की क्रांति से जुड़ गया |
                पार्टी के जिला स्तरीय समिति के सदस्य होने के नाते जो काम मुझे मिलता गया, मै उसे करता चला गया | मै जानता था कि यह कार्य मेरे स्तर का नहीं था | अक्सर मुझे मेरे परिवार को झूठ बोलकर भी कार्य करना पड़ता था | मेरा परिवार नहीं चाहता था कि मै मेरे पढाई के प्रमुख समय जबकि मुझे मेरे भविष्य के लिए सोचना चाहिए, मै इस आन्दोलन को इतना समय न दू लेकिन सवाल पुनः यह उठता है कि मुझे इस आन्दोलन से क्या मिला ? जिसका जवाब मै अब आप लोगों को देने जा रहा हूँ |

                मै एक नई दुनिया में आ चुका था, जिस उम्र में युवाओं को मस्ती करने और फिल्म देखने की होती है, मै उस समय देश की फ़िक्र करने लगा था और फिल्म की बजाये U-Tube पर 'आप' से जुडी वीडियो देखने लगा था | मै मेरे अन्दर आ रहे बदलावों को महसूस कर रहा था |

                 शुरुवात में हम लोग रविवार को हफ्ते में कंपनी बाघ में बैठा करते थे | मै बैठक में शामिल होने के लिए सभी सदस्यों को कॉल/मेसेज करता, मै हर बार नए लोगों से मुलाक़ात करता, इस तरह मुझे उन लोगों से बात करते-करते मुझे यह अनुभव प्राप्त हुआ कि मै आज किसी भी नए व्यक्ति से बात करने में हिचकता नहीं हूँ | मै हर थोड़े दिनों में कुछ रैलियों या सार्वजनिक कार्यक्रमों में शामिल होता, जिससे कि मुझे लोगों को सामना करने की शक्ति मिली | मुझे कई कार्यक्रमों में मंच संचालन करने का मौका मिला, जिससे मेरा स्टेजफोबिया ख़त्म हुआ |

                 मेरा लगाव AAP से सोशल मीडिया की वजह से हुआ था और AAP भी टेक्नोलॉजी का बहुत सहारा लेती है, कई लोग तो यह भी कहते सुनाई पड़ते है कि आप का उदय ही सोशल मीडिया से हुआ है |इस वजह से मै सोशल मीडिया पर पार्टी की गतिविधियों को पोस्ट करता रहता | ज़िन्दगी में यह पहली बार था कि जब मै किसी फेसबुक पेज का एडमिन हुआ और किसी ट्विटर हैंडल को संभाल रहा था | आप समझ ही सकते है कि किसी फसबूकिये के लिए ट्विटर किसी आफत से कम नहीं | मै अपने कार्यक्रमों को U-Stream के जरिये U-Tube पर प्रसारित करता, ये सब मेरी जिंदगी में पहली बार था |

             मै पार्टी सदस्य होने के नाते संपूर्ण ज़िले (अलवर) के लोकसभा व विधानसभा क्षेत्रों में घूमा, जिस बालक ने कभी पूरा अलवर नहीं देखा था, वह जिले के लगभग सभी क़स्बो, शहरों व प्रमुख गाँवों में घूम चुका था, इन  सभी जगहों पर मेरे अब संपर्क बन गए थे और कम उम्र का होने की वजह से मुझे संगठन में बहुत प्यार भी मिलता |

            मुझे अब लगभग सभी दैनिक आवश्यक सरकारी विभागों के कामकाज की जानकारी होने लगी थी, लोगों के कार्य कराने व कई बार निरिक्षण करने के लिए हम लोग विभागों में चक्कर काटते ही रहते थे | मैंने पहली बार किसी जिला कलेक्टर व किसी थानाधिकारियों से बात की | कई बार हमें सरकारी अफसरशाही से उलझना भी पड़ता | ये सभी बाते मेरे भौतिक चाल-ढाल और मानसिक सोच-समझ को बदलने लगी थी | बचपन से सुनते आ रहे कई राजनैतिक भ्रान्तिया भी अब बदल रही थी |

            यहाँ रहकर सबसे बड़ा फायदा तो मेरी SOFT SKILLS को हुआ | मैंने जिंदगी में पहली बार  Video Making, Photo Editing (Photoshop), Website Making और Android App Making पर काम किया,मैंने Mass Messaging/Mailing भी करना सिखा और हाँ, मैंने आम आदमी पार्टी अलवर के लिए फ्री वेबसाइट  व एंड्राइड एप  भी बनाई जो कि अब भी निष्क्रिय अवस्था में उपलब्ध है |

             इसी बीच मैंने कई बार Door-to-Door मेम्बरशिप कैंपेन में भी हिस्सा लिया, जिससे मुझे बहुत से लोगों की सोच समझने का मौका मिला, मेरी कम्युनिकेशन स्किल्स में सुधार आना शुरू हुआ और मुझे अच्छी तरह याद है, मैंने एक बूढी माँ सहित लगभग 180 लोगों की पेंशन शुरू करवाई, जिसने मुझे अभूतपूर्व सुखानुभूति करवाई | मुझे नहीं लगता कि अब मुझे कुछ और ज्यादा 'आप' के एहसान आप लोगों को गिनाने की जरुरत है | आज 'आप' की स्तिथि जो भी हो, मुझे उससे फर्क नहीं पड़ता है लेकिन जिस संगठन ने मुझे इतना कुछ दिया और सिखाया हो, उसके बारे में गलत बाते सुनकर बुरा लगना तो स्वाभाविक है |

             मेरा आप सभी लोगों से भी आग्रह है कि जिंदगी में कभी न कभी किसी भी संगठन से जुड़िये, बिना किसी लोभ-लालच के जो काम दिखे करते जाइये, नए विकल्पों को तलाशिये, आप अपने आप सीखते ही जायेंगे, बशर्ते दिल में सीखने का जज्बा हो | अंत में कुछ लोगों का नाम भी इस लेख में सम्मिलित करना चाहता हूँ, जिनसे मुझे सामाजिक, राजनैतिक, प्रशासनिक व तकनीकी समझ प्राप्त हुई- दीपक मिश्रा, मनीष गुप्ता, वागीश खुंगर, रमेश बेक्टर ब वीरेन्द्र विद्रोही | आप सभी सहयोग व प्यार ने मुझे इतना कुछ सिखाया, इस सबके लिए बहुत-बहुत धन्यवाद |

फिर भी अगर कोई कुछ कहना चाहे तो मेरा पूर्वाग्राही जवाब-
"क्यूँ डरूं कि जिंदगी में क्या होगा , कुछ न होगा तो भी तजुर्बा होगा "

                                                                                                                                 आपका
                                                                                                                              यश अरोड़ा  

Tuesday, 3 June 2014

Indian JUGAAD on its best

हम मध्यम वर्ग परिवार पूरी जिंदगी अपनी जरुरतो से ही जूंझते रहते है, ऐसे में कम स्त्रोतों में अपनी अधिक से अधिक जरुरतो को पूरा करना ही हमारा लक्ष्य रहता है | जब कभी हम अपनी जरुरतो को पूरा कर पाने में असमर्थ होते है तब हम 'जुगाड़' की तरफ जाते है | ये  कहा भी जाता है कि जरूरते अविष्कार  की जननी है |
आखिर है क्या ये जुगाड़ ?
कम रुपयो में अपनी जरुरत को अस्थायी रूप से पूरा करना जुगाड़ कहलाता है, भले  ही जुगाड़ अविश्वसनीय होते हो पर होते सुविधाजनक  ही है |
जुगाड़ों कुछ उदहारण यहाँ पेश है |
कितना विचित्र और अतुल्य है ना इन जुगाड़ों के साथ भारत ||

Tuesday, 20 May 2014

एग्जाम से पहले की ये रात


परीक्षाएं शुरू हो गयी है, परीक्षार्थियों को हालत गंभीर है, हर कोई चाहता है कि अच्छे नंबर लेकर पास हो लेकिन ये सब कुछ पेपर की एक रात पहले पर निर्भर करता है |
आखिर है क्या इस पेपर की एक रात पहले में ?
चारों और किताबे फैली हुई, आँखों में नींद ऊपर से सिलेबस कम्पलीट करने का भार, एक मन तो करता है कि सब कुछ छोड़ कर बस सो जाओ और जो होगा वो सुबह देखेंगे लेकिन मन नहीं मानता, जब सोने की कोशिस करते है तो नींद नहीं आती, फिर  किताबों में मन लगाओ, साथ ही मन में ये ख्याल आता है कि काश पहले पढ़ लिए होते |
कुछ लोग तो नींद न आये इसके लिए पहले से तैयारी करके रखते है अपने साथ चुटकी, सेंटर फ्रेश, सिगरेट, कोल्ड ड्रिंक्स आदि चीजों का प्रबंध रखते है| अधिकतर एक साथ कई परीक्षार्थी मिलकर पढ़ते है ताकि नींद न आये और फिर जब पढ़ते हुए थक जाओ या बोरियत महसूस हो तो फिर फेसबुक तो है ही | 2 - 2:30  बजे तक कुछ साथी तो लुढक ही जाते है, कुछ जो बिलकुल ही रात पर निर्भर होते है पूरी रात तक जाग लेते है |
ये विद्यार्थी भी किसी सिपाही से कम नहीं है, जिन्हे एक रात में ही जंग जितनी होती है | अद्भुत दृश्य और अनुभव, कभी न भूलेंगे विद्यार्थी जीवन |

Be natural and grow yourself

Once a king came to the garden and saw fading and dying trees, bushes, and flowers. An oak said that he dies because it can’t be as high as a pine. Applying to a pine tree, the king found her falling down because it can’t give grapes like a grapevine. And grapevine was dying because she couldn’t blossom like a rose. Soon he found a single plant, pleasing heart, bloomy and fresh. After questioning, he received the following answer:

- I think it’s a natural event, because when you planted me, you wanted to get a joy. If you would like to grow an oak, grapes or rose, you would put them. So I think that I can’t be anything else than what I am. And I try to develop my best qualities.

Look at yourself. You can only be yourself. It is impossible for you to become someone else. You can joy and blossom or you can fade if you do not accept yourself.

A POUND OF BUTTER

There was a farmer who sold a pound of butter to the baker. One day the baker decided to weigh the butter to see if he was getting a pound and he found that he was not. This angered him and he took the farmer to court. The judge asked the farmer if he was using any measure. The farmer replied, amour Honor, I am primitive. I don't have a proper measure, but I do have a scale." The judge asked, "Then how do you weigh the butter?" The farmer replied "Your Honor, long before the baker started buying butter from me, I have been buying a pound loaf of bread from him. Every day when the baker brings the bread, I put it on the scale and give him the same weight in butter. If anyone is to be blamed, it is the baker."


What is the moral of the story? We get back in life what we give to others. Whenever you take an action, ask yourself this question: Am I giving fair value for the wages or money I hope to make? Honesty and dishonesty become a habit. Some people practice dishonesty and can lie with a straight face. Others lie so much that they don't even know what the truth is anymore. But who are they deceiving? Themselves

Reaction on the election mandate

Some friends and relatives are continue trying to contact me, perhaps they want my reaction on the mandate.
I congratulate Mr. Narendra Modi to become Prime Minister of India. I appreciate your great workout and management. I hope you will deliver all your promises, Did.
As well as Aam Aadmi Party concerned, i also congratulate our four MPs from Punjab. After Delhi, Punjab showed to do it that indian peoples wherever want a good system. if we go in our history we see, BJP got only two seats in its first election and now AAP wins four. we are some ahead from BJP as compare and The revolution has began.
And now about me, i will ever protest against the corruption, dynasty,crony capitalism and wrong/humanless policies of our government. I will ever stand with honest politics, I will ever support Arvind Kejriwal and its vision.