जिंदगी बहुत ही अजीब सी कश्म्कस में चल रही हैं, जहाँ एक और मै अपने आप को एक जिम्मेदार व्यक्तित्व में लाने की कोशिश कर रहा हूँ, वही मेरे कुछ मित्र मुझे हमेशा मजाक में लाने कोशिश करते हैं | मै हमेशा यही सोच कर चुप हो जाता हूँ कि मुझे इनकी तरह नहीं बनना हैं ,कोई मेरे बारे में कुछ भी बोले लेकिन मुझे इनकी बातों से कोई फर्क नहीं पड़ना चाहिए | मै समझदार हूँ, मुझे धैर्य रखना चाहिए फिर वही दूसरी और मन में ख्याल आता हैं कि क्या मुझे इन लोगो से शक्ति के साथ पेश आना चाहिए ? या मुझे ऐसे लोगो का साथ ही छोड़ देना चाहिए ?
आशा करता हूँ कि इस चुनौती का जल्द ही कोई समाधान निकल आयेगा | इसी उम्मीद के साथ अपनी बात समाप्त करता हूँ |
यश अरोड़ा

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